दीवाली प्रार्थना

दीवाली पार्थना


हे राम दीप अब प्रज्वलित हो
करो उजाला जग भर में
हर कोने कोने में, हर तन मन में
हर रग रग में, हर पल पल में

दिखाए रोशनी अब दुनिया को, चमके भारत ऐसा जग भर में
स्वास्थ्य वैभव सब को मिले, रहो आप सबके मन में

हे दिव्य पुरुष अब आ जाओ
करो रामराज अब इस जग में
हे आदिपुरुष, सच्ची दिवाली कर दो
फैले उजाला दुनिया भर में
शुभ, स्वास्थ्य, वैभव सबको मिले
खुशियां हो सबके जीवन में

हे परम पुरुष आपका स्वागत है
विराजो मेरे मन मंदिर में🙏

------- ------ ------ ----- ------
🙏शुभ दीपावली 🙏
sharadprinja.com

आज इसने फिर से ‘ना’ सुना है

'आज' फिर गुजरने लगा है
'कल' जैसा लगने लगा है
'सन्नाटा' चीख रहा है
'स्याह' आंख मींच रहा है
'बेताबी' थक रही है
'खामोशी' कुछ बक रही है
हर कोना मोन है
'आइना' पूछे तु कौन है
अधर सिर्फ थिरक रहा है
जवाब फिर उलझ रहा है
दिल कहीं छुप गया है
आज इसने फिर से ‘ना’ सुना है

इजहार जरूरी थोड़ी है
हर चाहत प्यार थोड़ी है
मन का हो तो सबसे अच्छा
वो तुम्हारे मन का हो जरूरी थोड़ी है
इसे अधूरापन कहूं या जरूरतें कम
सबमें अकेले होना शान थोड़ी है
पी तो लेता हूं कभी ऐसे ही शौंक से
तुझे भूलने को पियूं, ऐसा तू आसमान थोड़ी है

वो नजर से दूर है, वो नजर के पास है
बंद आंखे हसीन सपने है, खुली आंखे स्याह रात है
हरेक रात में नींद और नींद में सपने और सपनो में तुम जरूरी नहीं
आजाद नींद के सपने तुम्हारे गुलाम थोड़ी है

बीती थी, बीती है, बीतेगी जरूर आज भी, कितनी भी स्याह हो रात,
बस पहली किरण का आगाज, फिर टिकना अंधेरे का अंदाज थोड़ी है

आज इसने फिर से ‘ना’ सुना है
बिखरे है सपने, गुम है मुस्कुराहट कहीं
जो तुझे मिला नहीं वो तेरी मंजिल था ही नहीं
बस टूटा है एक आसमान, आखरी मुकाम थोड़ी है

स्वतंत्रता दिवस की छुट्टी

आजादी की छुट्टी मनाने वालो –

बहुत से मरने वालों ने ये बीड़ा उठाया था, हमारे आज के लिए अपना कल गवाया था

गद्दारो ने हमेशा ही हमारी पीठ छिली थी, दुश्मन का लोहा हमने छाती पे खाया था

वो भी सो सकते थे अपनी मां के आंचल में, भारत माँ की पुकार को उन्होनें ज्यादा पाया था

उनकी मां ने उन्हे यही समझया था –

भगत तू दे कुर्बानी बथेरे भगत और आएंगे, फांसी फंदे को चुम कर उसने जीना सिखाया था

आज हम मस्त जीते हैं आजादी की हवा में

ये हवा कर्ज है उस सिपाही का, जो लौट कर न आया था

मना लो इस छुटी को ऐशो आराम से

बस बता देना अपने बच्चों को, ये आजादी कौन लाया था!

जय हिन्द! स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं!

शरद प्रिंजा sharadprinja.com

तुम मेरी कहानी की नजर बट्टू हो गई
जब जब किसी को मुझसे रश्क हुआ
तेरी कहानी बता दी, नजर दूर हो गई

चुप हम भी चुप तुम भी
चुप है ये तन्हाईयां
नजर भी चुप है
अधर भी चुप है
खामोश है परछाईंया

आस भी गुम है
एहसास भी गुम है
गुम है सब पास भी
रुक गई है पवन भी
रुकने लगे है श्वास भी

हे गंगे तुम अब थम जाओ

अविरल भाव से बहती हो, सब पवित्र कर देती हो

किंतु तुम अब थम जाओ, विनय है तुमसे थम जाओ

गंगोत्री से गंगा सागर तक, मानव ने तुम्हे दुषित किया

माँ माँ कह कर बार बार, सिर्फ तुम्हे शोषित किया

हे माँ तुम हो परमज्ञानी, अब और ना बातो में आओ

हे गंगे तुम थम जाओ, हे गंगे तुम थम जाओ


तुम्हे अविरल पवित्र रखना, सफल मानव का असफल प्रयास

ढूंडन जाये जल चाँद पर, धरती पर छिने तुम्हारे श्वास

 योग्य जो जल के भी न हो, उन्हे गंगा जल न पिलाओ

हे गंगे तुम अब थम जाओ


तुम हो शिव जट्टा से उदगमी, सृष्टि उद्धार तुम्हारा एकमात्र नियम ही

असंतुलित सृष्टि करते ये नर नारी, तुम्हारे लिए तो एक बिमारी

और अब पर दया न दिखलाओ, हे गंगे तुम अब थम जाओ, हे गंगे तुम थम जाओ


गंदे नाले और रसायन, करवाएंगे ये तुम्हारा पलायन

क्यू यूं अविरल तुम बहोगी, इस अयोगय मानव जाति पर – कब तक कृपा करती रहोगी

जीवन जननी हे दयामयी, तुम्हारा अस्तित्व खतरे में है अब

रुक जाओ स्वयं को बचाओ, अब शुद्धता और न फैलाओ

हे गंगे तुम अब थम जाओ, हे गंगे तुम अब थम जाओ


हम भगीरथ को क्या मुह दिखलाएंगे, शिव भी कब तक ये देख पाएंगे

घोर भयंकर तांडव होगा, प्रलय से बचना न संभव होगा

हे गंगे तुम वापस देवलोक चले जाओ, हे गंगे तुम अब थम जाओ

पाप कर्म चर्म सीमा पर आए, प्रलय ही केवल अंतिम उपाए

अब और न पवित्रता बरसाओ, हे गंगे तुम अब थम जाओ

मदर्स डे





#mothersday2022 #hindipoetry #loveyoumom

सारा साल ना पूछा माँ को
ना कभी प्यार से गले लगाया
दुनिया का दिखावा तो देखो
मदर्स डे का मैसेज सबने चिपकाया

सच में प्यार करो जो माँ को
सिर्फ मुस्कुरा कर बात करो
गोदी में कभी सिर रख कर
बच्चा बन कर बात करो

कोई मंदिर मस्जिद गिरिजाघर
माँ से ज्यादा न दे सकता है
इन इमारतों की कोख नही होती
जन्म कर्म सिर्फ माँ से ही होता है

जिसने उंगली पकड़ी थी तुम्हारी
काबिल हो तो हाथ पकड़ो
रोम रोम बना जिसके कणों से
सहारा बन पुण्य स्वीकार करो

ये दिव्य रूप है सचिदानंद का
किंचित प्रभु माँ में न भेद करो
गुण अवगुण न ढूंढना उसमे
श्रवण बन अभिमान करो
कृष्ण जीसस पैगंबर भी थे माँ ने ही जन्मे
शाश्वत सत्य स्वीकार करो
मदर्स डे मनाओ हर रोज
केवल एक दिन तक सीमित न ये त्योहार करो

mothersday2022 #hindipoetry #loveyoumom

हौंसला तो रख लिया है

हौंसला तो रख लिया है
दिल भी पक्का कर लिया है
समझाया है खुद को बहुत
गीली आंखों को ढक लिया है
समझ चुका हूं भगवान की मर्जी
उसी को अपनी कर लिया है

टीवी भी चल चुका है अब
शोर भी सब और है
फिर भी एक शून्य ने
मुझमें घर कर लिया है

आपको भूलें इतनी कमजोर नींव नहीं हमारी
मुस्कुरा कर याद करने का सबब
अपने स्वभाव में शामिल कर लिया है

पिता – तस्वीर बन गए हो मेरी तकदीर बनाने वाले

तस्वीर बन गए हो मेरी तकदीर बनाने वाले
टूकर टूकर देखते हो बिन बात के फोन में रम जाने वाले

खोया नही मेरा टुकड़ा की मैं ढूंढ पाऊं जिसे
मैं खुद उनका टुकड़ा हूं कहां से लाऊं मुझे ढूंढ लाने वाले

छत उड़ी हो जैसे अब धूप बिजली बारिश सब लगती है
अचानक कहां गए आशीषो का छप्पर बनाने वाले

ईश्वर अल्लाह रब किताबों में पढ़ा है सबने
पिता की खुशी में ही दिखते थे दुनिया बनाने वाले

मेरे ही आसपास हो सब कहते है
मुझे क्यूं नहीं दिखते ए छोड़ कर जाने वाले

योगी का योग हो गया रब से
अब बस गए कृष्ण लोक में
हमारी कहांनियां भी सुनाना उन्हें
उनकी हमे सुनाने वाले

चांद

हे चांद, तू सच में इतना सुंदर है?
या मेकअप करके आता है
सच बता चांदनी को तू किस तरह पटाता है


ऐसा कैसे वो तेरे हमेशा आसपास रहती है
क्यूं ऐस लगाता है तू उसके आगोश में सिमटता जाता है


ये तुम्हारा प्यार है या चांदनी का शक
ऐसे कैसे तू अकेला कभी नही निकल पाता है


कभी छुपता है, कभी निकलता है थोड़ा, कभी निकलता है बेशुमारी में
पर चांदनी की चमक हमेशा साथ लाता है

तोंद 😂

वो छोटी सी प्यारी सी लाडो से पाली
दुनिया से बचाकर बहुत संभाली
आंखों का लालच, जुबान का रस
संभाला तुझे प्यार से उम्र भर
झांकती वो बाहर गाहे बगाहे
ना समझती जमाना बैठा आंखे गड़ाये
तुझे पालने की रईसी अलग है
तेरे पीछे चलने की शान कड़क है
तू हर कपड़े को नई शेप है देती
स्वामी से कुछ इंच आगे ही रहती
तू वैभव संपदा का सच दर्शाती
तू गरीब मजदूर के पास कभी न जाती
प्रशाद समझ कर जो सब कुछ खाते
वही तेरा फैलाव अनुभव कर पाते
T shirt के नीचे से जब तू झांके
बटन तोड़ कर जब तू बाहर ताके
तब भूखा कमजोर वर्ग तुझसे बहुत चीड़ता
तोंद बढ़ाना नहीं है सबके बस का