दरवाजे

दरवाजे खुले रखे है तेरे आने के लिए
बहुत कुछ बचा रखा है लुटाने के लिए
पुराने खत, वो रूमाल और तस्वीरें छोड़ जाना
कुछ बहाना तो बचे तेरे लोट कर आने के लिए
चलो वो भी ले जाना, खत्म करो ये किस्सा
क्यों छोड़े अब कुछ और फिर पछताने के लिए

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माना की अब हम दोस्त नहीं
फिर भी क्या ये बात बता पाओगे?
कैसे भूले तुम वो हमारी बाते
क्या मुझे भी सीखा पाओगे?

कोई दर्द नहीं है, कोई मिठास भी नहीं है
बस खोखला पन है, और कोई आस भी नहीं है

ये खालीपन जिससे भरूं, क्या वो मलबा दिला पाओगे?
भूलने नही देती ये ठंडी हवा, क्या इसे थोड़ा रोक पाओगे?

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तुम तो उस सपने में थी ना
फिर बाहर कैसे आ गई
सुनो मैं डरपोक हूं साजन
कुछ कह न पाऊंगा
तुम जाओ सपनो में ही रहो
मैं फिर मिलने आऊंगा

परी सी लड़की

वो काफी हाउस की पीछे की कुर्सी
वो बालो से खेलती पागल सी लड़की
लंबी सी गोरी सी अख्खड़ सी लड़की
वो बिन बात के हस्ती लड़ती सी लड़की
वो इंग्लिश के लहजे में हिंदी सी लड़की
वो उड़ती फुदकती कबूतर सी लड़की
वो गहरे ख्यालों में उलझी सी लड़की
वो गर्मी की धूप में कुल्फी सी लड़की
वो सर्दी में चाय की चुस्की सी लड़की
वो मैगी नूडल्स के बालो सी लड़की
वो मेरे उलझे जवाबो के सवालों सी लड़की
वो मेरी लीग से परे की सी लड़की
वो अधूरी चाहत की पूरी सी लड़की
कल फिर आऊंगा इसी कॉफी हाउस में
फिर देखूंगा वो परी सी लड़की

Ukrain Russia war

My views on Ukrain Russia war and reaction of rest of the world


My views on Ukrain Russia war and reaction of rest of the world

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खोखलापन फिर नजर आया उस पहलवान का
देख दंगल परिचय दिया फिर से कायरता का
ना हो सका उससे फैसला डूबते दोस्त की जान का

कुछ अमीरों ने बनाया भेड़िया संगठन अपना
शांति के नाम पर तमाशा देखा कत्लेआम का
चुल्लू भर पानी मिले तो डूब जाओ महारथियों
UN, NATO न है न था किसी काम का

सबने लताड़ा बातो में दुर्योधन को बेशक
धर्म युद्ध में साथ खडे न हो तो लताड़ना किस काम काम
डटा राजा युद्ध में करता निडर कर्म आज भी
नकार दिया सौदा भागने का अमेरिकीस्तान का

तेरा युद्ध तू है योद्धा निकाल अस्त्र ओर आगे बड़
प्रजा ने बीड़ा उठाया आज अपने सम्मान का
मरना तो सबका है निश्चित क्यूं ना वीरगति प्राप्त हो
अजर अमर होने चला हर वीर यूक्रेनीस्तान का

समय बना शिक्षक समझाता संतुलन नियम दुनिया को
खुद को बडा कर, वज्र से भी कठोर कर अपनी भुजा
तेरी शक्ति ही तेरा कवच, बाकी सब भ्रम है इंसान का

क्यूं टकरा जाते हो

क्यूं टकरा जाते हो तुम रास्ते में बार बार
मान तो लिया कि तुम्हे जानता नहीं
ऐसे भी क्या टेडी नजरो से देखना मुझे
पूछता हूं तो कहते हो पहचानते नहीं

छूटी हुई ज़िंदगी


थोड़ी इधर थोड़ी उधर छोड़ता रहा गुजरती हुई जिंदगी
इसी उम्मीद में कि जीयेंगे एकदिन फिर कभी

पीछे मुड़ना तो अब असंभव सा हो गया
खुद को फिर से जीना एक सपना सा हो गया

पहले छोड़ते थे, अब छूट जाता है
आता हुआ हर पल रेत सा फिसल जाता है

जो जिया बस उसकी अब यादें साथ रहती है
छूटी हुई ज़िंदगी तु अब ख्वाहिश बन मेरे साथ रहती है

Career – moving to New job


आसमान बदल लिया मैने
और ऊंची उड़ान भरने को
पंख नए कर लिए मैने
तारों को छूना है एकदिन यकीनन
इसलिए, बादलों में घर कर लिया मैने

नए बादल, नए पंछी और ये सर्द हवा
नीले घोड़ों पर सफर करने का मन कर लिया मैने
पुराने बादल ने सिखाया ऊंचा उड़ना इतना
एक छलांग में नया आसमान अपना कर लिया मैने

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कुछ शेर

पूछते हो बुलबुलों का पता हवा से
वो बता भी दे तो कहां पहचान पाओगे


एक वहम और टूटा
तेरा जाना अच्छा तो नही लगा
पर एक झूठा और छूटा


तुम इधर हो उधर हो या कहां हो बता तो दो
तुम हवा ही आग हो या धुआं हो समझा तो दो


अब तो ऐसी आदत पड़ गई है अकेले रहने की
खुद ही पानी पीते है खुद ही को लोरी सुनाते है साहब
अपने ही सिर को थपथपाते है प्यार से
खुद ही को बाहों में भर कर सो जाते है जनाब


वो मुकदमा था मेरा अदालत थी तेरी
वो कत्ल था मेरा वकालत थी तेरी
वो तेरी अदालत और कातिल भी तू है
चलो लिया गुनाह अपने कत्ल का अपने ही सिर पे
तू बस सजा बता हमे सब मंजूर है


बहूतो ने काटा बहुतों ने मिर्ची लगाई है
ऐसे थोड़ी ना हम चिड़चिड़े हो गए
देख कर भी पास से निकल गए
ऐसे कैसे बिछोड़े हो गए
तुम्हारी तारीफ में भी तुम्हे अब नसीहत दिखती है
इतने कैसे तुम नकचढ़े हो गए
गजब दोस्ती थी हमारी जब हम एक जितने थे
फिर तुम ज्यादा बड़े हो गए

आपको हक है सजा चाहे जो देदो
वजह पूछने का हक तो हम भी रखते है

तुम्हे रुकना ग्वारा नही था

तुम्हे रोकने की कोशिश तो की थी
तुम्हे रुकना ग्वारा नही था
तुम्हारे साथ था तो सब अच्छा था
मैं भी तब तक आवारा नहीं था
कवर चेहरे पर क्या चढ़ाया था तुमने
क्या वो चेहरा भी तुम्हारा नहीं था
मज़ाक तो ऐसे ही करते थे तुम
हमारे जज्बात ने भी कुछ बिगाड़ा नहीं था
खेल लो सब तुम्हारे लिए ही आए है
हमारे ख्याल में भी कुछ हमारा नहीं था
वो घर से निकलना किताबों के बहाने
उन बहानों का भी ठिकाना नहीं था
तुम्हारी मर्जी कह कर अपनी चलाना
वो अंदाज गुफ्तगू भी तो हमारा नही था

ऐ जिंदगी – आजा बात करते है

ऐ जिंदगी, चाय पर मिलेगी आज? आजा बैठ कुछ बात करते है

अरसा हुआ तुझसे मिले हुए, आजा आज मिलते है, कुछ तेरी कुछ मेरी बात करते है

तुझे देखता हूँ तेज भागते हुए, कहाँ जाती हो?

चलती रहती हो हमेशा, थक नहीं जाती हो

अगर थक जाओ कभी तो आना मेरे पास, बहुत वक़्त छुपा कर रखा है मैंने,

किसी को बताना नहीं, बस चुप करके आ जाना, टाइम पास करते है

–+

तुम्हें याद है बचपन में जब मैं बीमार पड़ा था? मेरे पापा ने बचाया था तुम्हे

तुम इतनी बेशरम हो वो एहसान उतारने भी नहीं आती,

हुब-हू हो मुझ जैसी फिर भी इतना हो इतराती

आओ मिलकर ये शिकवे दरकिनार करते है, एक फिर से मुलाकात करते है

देख लो अब भी मान जाओ, थोड़ा रुको, और पास आओ, नहीं तो हम तो निकल जायेंगे कभी

फिर न कहना नयी जिंदगी को लेकर बचपन में फिर आएंगे जभी,

वो नयी सुबह होगी नयी जिंदगी के साथ

शायद वो मेरी बात मानेगी, चलेगी, रुकेगी और बात करेगी मेरे साथ

फिर तुम ना कहना की मुलकात करते हैं, एक और बात करते हैं

ऐ जिंदगी, चाय पर मिलेगी आज? आजा बैठ कुछ बात करते है ||

Salute to CDS Bipin Rawat and 12 bravehearts

क्या लिखूं उस गाथा को जो तुम अपने खून से कह गए
बड़े खुशनसीब निकले 12 जो वर्दी में अलविदा कह गए


आंखे नम है देश की तुम्हारे बलिदान पर
तड़पी तो वो धरती भी होगी जहां उड़न खटोले ढह गए


तुम्हे लेने तो आसमान को भी नीचे आना पड़ा
काल के चक्र पर तुम नई कहानी कह गए