तुम्हे रुकना ग्वारा नही था

तुम्हे रोकने की कोशिश तो की थी
तुम्हे रुकना ग्वारा नही था
तुम्हारे साथ था तो सब अच्छा था
मैं भी तब तक आवारा नहीं था
कवर चेहरे पर क्या चढ़ाया था तुमने
क्या वो चेहरा भी तुम्हारा नहीं था
मज़ाक तो ऐसे ही करते थे तुम
हमारे जज्बात ने भी कुछ बिगाड़ा नहीं था
खेल लो सब तुम्हारे लिए ही आए है
हमारे ख्याल में भी कुछ हमारा नहीं था
वो घर से निकलना किताबों के बहाने
उन बहानों का भी ठिकाना नहीं था
तुम्हारी मर्जी कह कर अपनी चलाना
वो अंदाज गुफ्तगू भी तो हमारा नही था

ऐ जिंदगी – आजा बात करते है

ऐ जिंदगी, चाय पर मिलेगी आज? आजा बैठ कुछ बात करते है

अरसा हुआ तुझसे मिले हुए, आजा आज मिलते है, कुछ तेरी कुछ मेरी बात करते है

तुझे देखता हूँ तेज भागते हुए, कहाँ जाती हो?

चलती रहती हो हमेशा, थक नहीं जाती हो

अगर थक जाओ कभी तो आना मेरे पास, बहुत वक़्त छुपा कर रखा है मैंने,

किसी को बताना नहीं, बस चुप करके आ जाना, टाइम पास करते है

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तुम्हें याद है बचपन में जब मैं बीमार पड़ा था? मेरे पापा ने बचाया था तुम्हे

तुम इतनी बेशरम हो वो एहसान उतारने भी नहीं आती,

हुब-हू हो मुझ जैसी फिर भी इतना हो इतराती

आओ मिलकर ये शिकवे दरकिनार करते है, एक फिर से मुलाकात करते है

देख लो अब भी मान जाओ, थोड़ा रुको, और पास आओ, नहीं तो हम तो निकल जायेंगे कभी

फिर न कहना नयी जिंदगी को लेकर बचपन में फिर आएंगे जभी,

वो नयी सुबह होगी नयी जिंदगी के साथ

शायद वो मेरी बात मानेगी, चलेगी, रुकेगी और बात करेगी मेरे साथ

फिर तुम ना कहना की मुलकात करते हैं, एक और बात करते हैं

ऐ जिंदगी, चाय पर मिलेगी आज? आजा बैठ कुछ बात करते है ||

Salute to CDS Bipin Rawat and 12 bravehearts

क्या लिखूं उस गाथा को जो तुम अपने खून से कह गए
बड़े खुशनसीब निकले 12 जो वर्दी में अलविदा कह गए


आंखे नम है देश की तुम्हारे बलिदान पर
तड़पी तो वो धरती भी होगी जहां उड़न खटोले ढह गए


तुम्हे लेने तो आसमान को भी नीचे आना पड़ा
काल के चक्र पर तुम नई कहानी कह गए

जुल्म ए जालिम

बहुत खुश हूं तेरे आगोश में ए जालिम, तेरा ये जुल्म इतना लुभाता क्यूं है 
हिम्मत है तो उतार खंजर सीने में, ये धीरे धीरे चुबाता क्यूं है

रोक देता है सांसे तेरा बार बार भड़कना, फिर तू हर बार मुस्कुराता क्यूं है
लगाई है आग तो जलने दे घर सबके, तू बार बार बरसात कराता क्यूं है

उठ गया हूं फिर से सोने के लिए, तू बार बार मीठी लोरी सुनाता क्यूं है
गर इतना ही तंग है मेरी मौजूदगी से तू, फिर सपने में भी बार बार मिलने आता क्यूं है

नहीं मिलना तो ना मिल, हम भी भूले तुझे, ये मेरा ही सामान बार बार तेरी याद दिलाता क्यूं है
हकीकत से ख्वाईश बना है तू, “टुटता है हर सपना” कह कर बार बार डराता क्यूं है
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किसके लिए?

जानता था गलती कर रहा हूं
ना करता तो ना करता किसके लिए?
कुछ तो मकसद तेरे आने का भी होगा
हमे तो बताओ आए थे जिसके लिए

वो ना आए खिड़की पर एक बार भी
थकती रही साइकिल हमारी जिसके लिए
ढूंढ लेते थे उत्तर का रास्ता दक्षिण से भी
उड़ाते रहे कागच के रॉकेट जिसके लिए

लानत दे रहा था वो जाते जाते
अब न देता तो बचाता बताओ किसके लिए
इबादत करना अब उसे मंजूर नहीं
वो करे तो क्यों करे और करे किसके लिए
छोड़ दी शराब हमने पीनी अब
गम डुबाते तो क्यूं डुबाते और बताओ किसके लिए

कुछ कुछ अधूरा

प्यार तुमने भी किया मैंने भी लिया
इज़हार तुमने भी किया मैंने भी किया
दुनिया को बताने की हिम्मत न मैंने की न तुमने की
अधूरा रहने का फ़ैसला मैंने भी किया तुमने भी किया

कुछ कुछ अधूरा रह जाए तो अच्छा है
सबकुछ न कह पाये तो अच्छा है
कम दिखते है हंजू जब मैं चलता हूं
सबको सबकुछ न दिख पाए तो अच्छा है

दूरियां गजब लगती है मुझे
जुदाई कम लगती है मुझे
सोचता हूं एक इश्क और कर लूं
उदासी बड़ी हसीन लगती है मुझे

दूरियां

मैं भी रोया था उनसे मिलकर बहुत
वो मिल रहे थे बिछड़ने के लिऐ
न ढूंढने की कसम देकर
वो जा रहे थे जिंदगी भर के लिऐ
वो खत भी जलवा गए थे जाते जाते
जिसमे वादे किए थे उम्र भर के लिऐ

वो तेरा, वो मेरा, वो हमारा अब सब किसका है?
वो सब संजोया था किसके लिए
वक्त की आग ही ठंडक दे सके तो दे
फूंक गया मुसाफिर चलते चलते
आशियाना सजाया था जिसके लिए

Few Lines on my Dentist

चार दांतो पर चौंतीस चक्कर मैंने अब तक लगाए
फोर्सेप एक्सप्लोरर लेकर वो दांतो मे घुस जाए
सच में मिलने आता रहूंगा दांत चाहे ठीक हो जाए
हे देवी, थोड़ी सी कृपा करदो हम भी खाना चबा पाएं

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उसने चेहरा दूर से देखा तो उसे प्यार हो गया
तुम अंदर झांकती हो तुम्हारा क्या होगा


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मेरे दर्द को मुस्कुरा कर दूर कर सकते थे वो
मगर दांत को उखाड़ना उन्हें आसान लगा
मैं समझता था उन्हे मेरे दर्द से हमदर्दी है
उन्हे तो नोटों के आने का आगाज लगा


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वो एनेस्थीसिया जो दिया था तुमने दांतो मे
अब दिल में उतर गया है
तुम्हे देखता हूं तो सुन्न सा लगता है
ये प्यार नहीं तो क्या है


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ऐसी भी क्या जिद्द मिलने की
दर्द दिया और बुला लिया
एक मिटाया दो और दिए
तुम्ही बताओ दवा दी या मर्ज दिया


चलो चलता हूं, आता रहूंगा
चार निकले अठाईस बचे, उन्हे भी आपसे निकलवाता रहूंगा
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आज कल

तुमको तो पता है राते कैसे गुजर रही है आज कल
खुली आंखों में नींद बसर रही है आज कल


जानते हो तो बोलते क्यूं नहीं
अब और किससे झूठी तारीफ सुन रहे हो आज कल


देखना सुनना मुस्कुराना सब बीत गया
किसके फरेब में फस रहे हो आज कल


पास से निकल गए नजर चुरा कर
लगता है किसी नए से मिल रहे हो आज कल

इंतजार

सही वक्त के इंतजार में उम्र गुजार दी
लोगो ने बुरे वक्त में भी त्योहार सजा लिय


तुम ख्वाहिश करते रहे सच होने की
हमने झूठ को ही सच का फरमान मान लिया


नींद आंखों मे रही, ज़हन में न पहुंची
हमने करवट को ही नींद का एहसान मान लिया


खरखराहट सूखे पत्तों के हिलने की हुई
खामोशी को उनके आने का पैगाम मान लिया


हम तुम्हारे शांत होने का इंतजार करते रहे
तुमने शराफत को हीज्र ए निशां मान लिया