टोमडी साहिब – लुप्त होता प्रसिद्ध तीर्थ

A famous Hindu Pilgrimage struggling to save its structure due to Pakistan Government Apathy. There used to be a government Holiday in the Gujrawalan disrict for 3 days before partition however nowadays its into complete sad state. Lord Vishnu took Avtaar of Baba Ramand ji and stayed here for 12 years. Guru Nanak Dev ji stayed there for 3 days with Baba Saidas ji on his way back from Kabul. This is an effort to show the emotions and thought of the Temple which has seen crowd of thousands of devotees and now completely stranded and waiting for someone to restore it to pre 1947 state!

Even today local muslim ladies still visit the Beri Tree, light a lamp and get their wishes fulfilled. Great Saint Saidas ji used to stay there 500 years ago and his son Lord Vishnu Avtaar Ramanand ji immersed in the Sarovar by putting his wooden stick which has become a Beri Tree and still exist there.

Till 1947, Gujrawalan district of Punjab used to be a famous Hindu pilgrimage place. People used to come to Mandir Tomri Sahib, Baddo-ki Goasain for annual festival of Narsing Chodash and budh purnima (“Mela Yag”) and monthly chodash of every shukla paksha for Jyoti darshan and blessings of Sadguru. During the mela yag occasion, a district level holiday used to be declared by the government which was application on statutory institutions like court and schools as well.

Post partition of India-Pakistan, entire hindu population of Baddo-ki gosain village and devotees etc. moved to India and rest of the world.
Now, Government of Pakistan has shown apathy and that famous Pilgrimage is into sad state.

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कितने सावन कितने भादो, कब से देखूं  राह

जान बचाकर 1947  भागे, अपना कोई न रहा

सर झुकाकर मन्नत मांगी, मैंने सब दिया

मेरा आशीष आज भी उस पर, जिसने याद किया

कुछ ने तोड़ी मेरी ईंटे, कुछ ने स्वर्ण गागर उतारे

मूरत उजाड़ी, चबूतरा तोड़ा, गंदे वाक्य उबारे

मैं तो देखूं  फिर भी प्यार से, अंजान ये बेचारे

समाध और बेरी बने साक्षी, देखे प्रभू नज़ारे

कुछ प्यारे आज भी दिया बत्ती कर आशीर्वाद ले जाते हैं,

किन्तु विस्थापित अपने बच्चे याद बहुत आते हैं

प्रसिद्ध तीर्थ आज गुमनामी पर, ढूंढे अपना वजूद

सीमेंट गिरता, झरझर इमारत , सुख गया नल कूप

कर्त्वय करो, आगे बढ़ो, मिल जाएगा उपाय

एक होकर शोर मचाओ, आवाज यहां तक आये

इमारत न समझो मैं जीवित हूं, साई दास सहाय

ये है अलौकिक ब्रह्मसर तीर्थ जहाँ रामानंद जी समाय

ब्रह्मपुराण में उल्लेख मेरा, विष्णु अवतारित होन आये

भर भर असीस देकर, बाबा जी करते तुम्हे समर्थ

ध्यान भजन कर समय लगाओ, कैसे स्थित हो फिर से तीर्थ

भगीरथ खोजु अब तो मैं भी, जो ले आये लुप्त सरोवर

मैं तुम्हारा सभ्यता सतंभ, मुझसे तुम्हारे संस्कार

टोमडी की राह पर चलना, करके पूर्ण विश्वास

चौदष दर्शन रामानंद के, करे सबका उद्धार

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आलस्य ज्ञान! Lethargic Wisdom !

हे आलस्य तू भी कितना आलसी है

क्या तेरा एक ही ग्राहक है? जब देखो मेरे पास बैठा रहता है

पहले तो कभी कभी मेरे पास आता था, अब 24 घंटे यहीं पसरा रहता है

देख मैं तुझे कितना प्यार करता हूँ, तेरी हर बात मानता हूँ

तुझे याद है उस दिन जब सुबह मै जा रहा था सैर के लिए? तेरी बात मानी और नहीं गया

और वो योगा  वाला दिन, फिर तेरी बात मानी और नहीं किया

तेरा प्रतिबिम्ब बन गया हूँ,  ये बात जानता हूँ

कितने सारे ऐसे वाकये है मेरे समर्पण के, क्यूंकि तेरी शक्ति को पहचानता हूँ

मेरे लिए तो तू देवता तुल्य है, बैठे बैठे आराम  देता है  तू तो अमूल्य है

लोग कहते है तेरे साथ रहने से ज़िन्दगी छोटी होती है,

पर वो छोटी भी तो कितनी noughty होती है

आराम से बैठ कर निकलती है, धीरे धीरे लम्बी होकर चलती है

इन कसरत वालो को क्या पता सोने में क्या मज़ा आता है

जब 3-4 बार सुबह का अलार्म बंद करो, तो एक नया नशा सा छाता है

सुबह 2 घंटे भागकर ये लोग वो सुख  नहीं पाते, जो दोपहर की अँगड़ाई में तू दे जाता है

घन्य धन्य है निष्ठा तेरी, राह में न आता कोई रोड़ा

असफल हुए सारे मित्रो के प्रयास, पर तूने मेरा साथ न छोड़ा

सब कर्मो की कामना तू है, तेरे तपस्वी खाये ब्रेड पकोडा

परमसुखी की उपमा है ये पावन शालीन शब्द ‘निगोड़ा’

चल अब तू भी सो जा, थक गया होगा

सुबह से मुझे आलस दे रहा है, तू भी तो पक्क गया होगा

चल फिर दोपहर में फिर जम्हाई लेते हुए मिलते है

मुझे तो तूने दिया वो आराम, जिसके लिए जग करे सारी उम्र काम

अज्ञानी 5 दिन काम करे, 2 दिने तुझे ढूँढ़ते है

मुझ जैसे निर्वाणी तो तुझे 7 दिन पूजते है

तू बहुत कर्मठ है, 24 घंटे खुद फैलने का कर्म करता और कराता है

तू तो अत्यंत ज्ञानी है, मेरे लिए तो तू ही विधाता है 

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Hindi Diwas

हिंदी बोलने लिखने में शर्म ना करे, नई पीढ़ी ने यदि हिंदी खो दी तो समझो संस्कृति भी लुप्त हो जाएगी

कुछ पंकतियां हिंदी दिवस पर :-

माँ ने पाला, माँ ने पोसा, हाथ पकड कर चलना सीखाया
बड़ा हुआ पढ़ोसन लगी प्यारी, उससे मिलकर रोब जो आया

आधुनिक बनने के चक्कर में, उसने माँ से पीछा छुडाया
पढ़ोसन के पिज्जा बर्गर के आगे, लगे घर का खाना पराया

ज्ञान शिखर वो मातृ छाया, लगे पुत्र को अब अपमान
आंख फिराए आँखों का तारा, जैसे कोई खंडित सामान

माँ इंतजार करे, कब बेटा आये, करे मुझसे 2 बात
आधुनिक बेटा पहने कोट पेंट अब, दिखाये सूती धोती को औकात

किंतू बेटा असूलो का पक्का, पक्की उसकी याददाश्त
मार्त दिवस वाले दिन, एक संदेश तो आया था मां के पास

बस इतना सा ही रिश्ता अब रह गया
मातृ दिवस वाले दिन की बधाई भी अग्रेषित संदेश से कह गया

यही हाल हम सबका है, दिखाये हिंदी को रोज़ उसकी औकात
हिंदी दिवस वाले दिन हम भी बस कर देते एक संदेश पास


विडंबना : रचना का शब्दकोश अंग्रेजी में
संदेश – whatsapp message
अग्रेषित संदेश – forwarded message

Temple Site is up now www.TomriSahib.in

Happy to inform everyone that our Mandir site Tomrisahib.in is up now

this is newly constructed as the old one Tomrisahib.com was non operational due to Net4India issue. We tried for many months to get the domain name and data recovered however no success.

May Baba ji bless everyone!

Dhan Baba Saidas Avtaar Ramanand Ji Maharaj ji Jai!

A Brief Introduction of our Temple and Great Hindu Community!

Till 1947, Gujrawalan district of Punjab used to be a famous Hindu pilgrimage place. Devotees from across India used to visit Mandir Tomri Sahib, Baddo-ki Goasain for annual festival of Narsing Chodash and Budh Purnima (“Mela Yag”) and monthly Chodash (14th day of Hindu Calendar month) of every shukla paksha for Jyoti darshan and blessings of Sadguru ji. During the Mela Yagya occasion, a district level holiday used to be declared by the government which was applicable on statutory institutions like court and schools as well.

Post partition of India-Pakistan, entire #hindu population of #Baddo-ki #gosain village and devotees etc. moved to #India and settled in different states. #Gaddi Nashin #Mahant of that time Shree Ram Narayan ji moved to Ghaziabad and continued the worship. After Mahant Shree Ram Narayan ji his son Mahant Rameshwar Das ji was honored with the great responsibility and after him his younger brother Mahant Kishore Chand Goswami ji was given this divine responsibility. Lots of hardwork was put in by all honable late Mahants in spreading the awareness about mandir.

With the blessings of Baba #Saidas Ji and Avtaar Baba #Ramanand ji a mandir has been built in #Uttam Nagar by Mahant Kishore Chand ji. Land for the mandir was donated by Sh. Darshan Lal ji. Now, Mahant Bharat Bhushan Gosawmi ji (s/o Late Mahant Shree Kishore Chand ji) is honored with the great responsibility. #Devotees from everywhere come to #Mandir on every occasion for getting blessings and worshipping #Sadguru.

#Mela #Yagya, Sadguru Baba Shree Saidas ji’s (Avtaran Divas) Birthday on 30th January of every year and, monthly Chaudash of every shukla paksha (14th Day of Indian Calendar) which is related with Avtaar Ramanand Ji and other festivals are being celebrated in the mandir.

Mandir Committee is run by devotee members under the directions & guidance of Mahant Shree Bharat Bhushan Goswami ji.

Our Mission

Our mission it to procure land in central India and create a replica of our ancient Mandir by mapping inch by inch of Gujrawalan Pakisant situation ancient mandir. It was a master piece of art and attraction for Hindu culture. We are very sure that Baba ji will strengthen our efforts and help us fulfill this dream!

Mitti – मिट्टी (Clay)

Mitti (Clay) is the end of our body and start of new life. its a cycle which starts from clay and gets united with clay when ended. All religions talk about this fact however we end up spending our time in talking about wealth, ego, negativity and all other Rasa (emotions). #Poem #Poet #kavita #hindi #kaavy #Kabira #India #God #Mitti #Clay #Truth #sadguru

मिट्टी तेरी, मिट्टी मेरी, मिट्टी में होना विलय

मिट्टी मिट्टी से क्यों लड़े, ऐसा क्या है ध्यये

निराकार साकार ने, दिया सब कुछ मिट्टी बतायें

मिट्टी से ऊपजे, मिट्टी मिले, मिट्टी संचय काहे

मिट्टी सृष्टि की कोख है, सब जीवो का मूल

राम कृपा से हो गई, मिट्टी कृष्ण चरणन की धूल

मिट्टी तू तो महिमामयी, सब जीवो की मां

तुझमे जन्मे, तुझमे मिले, चाहे कोई भी हो सूरमा

जूठा रंग रूप है, जूठा सब अभिमान

एक दिन मिट जाएगा, मिट्टी में सब समान

मिट्टी मिट्टी में तन गई, कोई ना जीत पाये

जीते तो भी मिट्टी, हारे तो भी मिट्टी हो जाए

मिट्टी तू क्यों अकड़ती, ऐसा तू क्या पाये

ऐसी कौन सी चीज है, जो मिट्टी ना हो जाए

मिट्टी मिट्टी में भेद है, जब तक रहे अहंकार

सांस जब निकल गई, तब मिट्टी हुआ संसार

मिट्टी अजन्मी जून है, तेरा जीवन अकाल

तुझमे सारा सार है, तुझमे सारे सवाल

मिट्टी तू तो धूल है, उड़े सारे संसार

जब उड़ना बंद करे, टीले का दे आकार

टीला मारुथल में रोज़ बदले रूप

आस्थिरता ही नियम है, स्थिरता दे विदूख

मिट्टी तू वो काल है, जिसने देखा अकाल

मंगल पर भी तू मिले, रंग तेरा हो लाल 

धूल पोंछते, धूल झाड़ते, रहते धूल से दूर

सब कुछ रहना इसी में, करले इसे कबूल

मिट्टी उपजे भोजन मिले, भोजन से संसार

मिट्टी अन्नपूर्णा सब की, उपज खाए संसार

पुतले बनाये, पुतले तोड़े, वो देखो कुम्हार

मन कृष्ण का दास है, मिट्टी लाई उधार

कर्ज मुक्त होने का, एको ही है उपाये

अपनी मिट्टी पहचान ले, मन को राम में लगाये

मिट्टी मिट्टी पर लिखे, मिट्टी पढ़त मुस्काये

मिट्टी होना ही नियम है, फिर काहे इतराये

US – Afgan satire

ना वो अफगानिस्तान के निकले, न किसी पठान के निकले

वो तो कुछ फिरंगे थे, जो अंग्रेजीस्तान के निकले

जोंक की तरह हर खनीज को लूटा, खज़ाने खाली खाली कर वो परेशान से निकले

जिससे सत्ता छिनी थी, उसी को नवाज़ दी

जाते जाते भी वो कर गए एक एहसान दुनिया पर,

लौट कर बुद्धू घर आया कहावत मान कर निकले

जब राक्षस ने दीखाये बड़े बड़े दांत बलवान को, वो कोलगेट और ब्रश से मांज कर निकले

गनी को समझा कर एक बड़ा ठस्सा दिया

वो छुपे जान बचाए, ये आल द बेस्ट कह कर निकले

अफगान की लड़ाई को, 20 साल का व्यंग बना दिया

वो ग़रीब के जनाजे पर, मूंछें तान कर निकले

जो करते थे दावा जुलम को मिटाने का, आतंकवादी को अपना असला थाम कर निकले

सैनिक बहादुर थे इसमे कोई संशय नहीं, बिडेन   की राजनीति पर पीठ तान कर निकले

मा ने लाल पकडाये कटेली तारो में, वो हमदर्दी दिखा कर उनके जहान से निकले

करूँ क्या कटाक्ष मैं शातीर बलवान पर, वो कटाक्ष पर कटाक्ष कर विमान से निकले

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Kanha – Milan ki Pyaas

कहां मिलोगे मुझे कन्हैया, कुछ तो अपनी राह बताओ

उम्र बीत गयी तुमको ढूँढ़ते, कभी कही तो टकरा जाओ

मैंने तो जन जन से पूछा, बहती हुई पवन से पुछा

कहाँ छिप गए हो मेरे कान्हा, अब बस और न मुझको तडपाओ

हम तो तेरे दास है स्वामी, तू तो है अन्तर्यामी

हम भक्तो से क्या शर्माना, हमे न चाहिए कोई खजाना

हम तो बस तेरे दर्शन के प्यासे, हमारी भी प्यास बुझाओ

कहां मिलोगे मुझे कन्हैया, कुछ तो अपनी राह बताओ

वृन्दावन ढूंडा, मथुरा ढूंडा

हर तीरथ हर मंदिर में ढूंढा

हर सुन्दर मूरत में ढूंढा, तेरी बनायी सूरत में ढूंढा

कहीं तो अपना दरस दिखाओ

कहां मिलोगे मुझे कन्हैया, कुछ तो अपनी राह बताओ

कब वो सूंदर घडी आएगी, जब तुम्हारी सूरत दिख जायेगी

चाहे वो अंत छड़ी हो, तपस्या कितनी भी कड़ी हो

तब तक तुम्हे ढूँढ़ते रहेगे, जब तक तुम मिल न जाओ

कहां मिलोगे मुझे कन्हैया, कुछ तो अपनी राह बताओ

हे मेरे कान्हा दरस दिखाओ, जीवन को तृप्त कर जाओ

आसान नहीं मुझसे पीछा छुड़ाना, मैं तो हूँ तुम्हारा पक्का दीवाना

जल्दी से अब आ भी जाओ, हे मेरे प्रभु दरस दिखाओ

कहां मिलोगे मुझे कन्हैया, कुछ तो अपनी राह बताओ

Jealousy discussion of Krishan Shringaar Articles

ये चर्चा है श्री कृष्ण के तीन अभिन्न श्रृंगारो की, कैसे वो एक दूसरे से प्रेम युक्त ईर्षा करते है

बांसुरी बोली कृष्ण चरण पर लिपटी धुल से –

हे बड़भाड़ी धुल रानी, ऐसी किस्मत कहाँ से लिखवाई

जिन चरनन का वंदन करे देवता, तू उनपर लिपटत जाई

साधु संत तुझे पाने ख़ातिर, जनमो की तपस्या करत आये

बड़बागी चरण धूल तू, परम पवित्र बन कर छायी

धुल का जवाब –

मैं बड़भागी बहुत इतराती, पूर्ण पुरुष का संग जो पाया

जब जब कान्हा आगे आये, हर कदम मेरे सीस पर आया

किन्तु इर्षा तुमसे करूँ थोड़ी –

जिस कान्हा साधे जग सारा, साधा तुझको वो कन्हैया

कृष्ण के लब और कृष्ण को साँसे, ये अहो भाग्य बस तुमने पाया

अभिन्न अंग हो तुम कान्हा का, जिसने सब संसार नचाया

बांसुरी का जवाब –

बात तुम्हारी सही मैं मानु, फिर भी इर्षा तुमसे जाणु

दूसरी इर्षा मोरपंख से, जो कृष्णा के माथे पर साजे

मोरपंख का जवाब-

बलिहारी मैं अपने स्वामी के, जिसने मुझे ये स्थान दिलाया

जिस कृष्ण ने सजाया संसार, मैंने उसके मस्तक को सजाया

हम तीनो का मान एक है, क्योंकि कृष्ण ने हमें अपनाया

इर्षा तो मुझको भी होवे, छू जो न पाती प्रभु कमल पाया

कृष्ण का जवाब –

तुम सब मेरे प्रिय हो अपने, तुम तीनो हो मेरी छाया

बलिहारी मैं तुम्हारी भक्ति पर, तुमने मुझे हमेशा सजाया

तुम तो मेरे परम भक्त हो, एक पल तुम्हारे बिन रह न पाया

प्राण प्यारे तुम तीनो मुझको, तुमने कृष्ण को श्री कृष्ण बनाया

ठुमक ठुमक कर नाचे कन्हैया

ठुमक ठुमक कर गोलू मोलू, मेरे मन को मोहता जाए

सांवला रंग तीखे नैना, कानो में कुण्डल सजाये

मनमोहक मुस्कान उसकी, माथे पर तिलक लगाये

मटक मटक कर नाचे कान्हा, यशोदा मां को खुब हसाये

माखन मिश्री प्यारे उसको, चोरी कर कर खाए खिलाये

शिशु अवस्था में पुतना मारि, मुख में तीनो लोक दिखाये

सारे जगत का तू स्वामी, कालिया नाग को मार बहाये

बंसी की धुन पर मोहित गोपिया, राधा संग वो रास रचाए

कंस मामा की मंशा को जाने, पाप कर्मों से मुक्ति दिलाए

स्वामी होकर सारथि बना जब, सब संसार को गीता ज्ञान दिलाये

ठुमक ठुमक कर नाचे कन्हैया, मेरा मन हर्षित होता जाए

नहीं चाहिए धन और दौलत, कान्हा तेरी भक्ति मिल जाए

लड्डू गोपाल घर में विराजे, मन मेरा मोहित होता जाए

ठुमक ठुमक कर गोलू मोलू, मेरे मन को मोहता जाए