Mitti – मिट्टी (Clay)

Mitti (Clay) is the end of our body and start of new life. its a cycle which starts from clay and gets united with clay when ended. All religions talk about this fact however we end up spending our time in talking about wealth, ego, negativity and all other Rasa (emotions). #Poem #Poet #kavita #hindi #kaavy #Kabira #India #God #Mitti #Clay #Truth #sadguru

मिट्टी तेरी, मिट्टी मेरी, मिट्टी में होना विलय

मिट्टी मिट्टी से क्यों लड़े, ऐसा क्या है ध्यये

निराकार साकार ने, दिया सब कुछ मिट्टी बतायें

मिट्टी से ऊपजे, मिट्टी मिले, मिट्टी संचय काहे

मिट्टी सृष्टि की कोख है, सब जीवो का मूल

राम कृपा से हो गई, मिट्टी कृष्ण चरणन की धूल

मिट्टी तू तो महिमामयी, सब जीवो की मां

तुझमे जन्मे, तुझमे मिले, चाहे कोई भी हो सूरमा

जूठा रंग रूप है, जूठा सब अभिमान

एक दिन मिट जाएगा, मिट्टी में सब समान

मिट्टी मिट्टी में तन गई, कोई ना जीत पाये

जीते तो भी मिट्टी, हारे तो भी मिट्टी हो जाए

मिट्टी तू क्यों अकड़ती, ऐसा तू क्या पाये

ऐसी कौन सी चीज है, जो मिट्टी ना हो जाए

मिट्टी मिट्टी में भेद है, जब तक रहे अहंकार

सांस जब निकल गई, तब मिट्टी हुआ संसार

मिट्टी अजन्मी जून है, तेरा जीवन अकाल

तुझमे सारा सार है, तुझमे सारे सवाल

मिट्टी तू तो धूल है, उड़े सारे संसार

जब उड़ना बंद करे, टीले का दे आकार

टीला मारुथल में रोज़ बदले रूप

आस्थिरता ही नियम है, स्थिरता दे विदूख

मिट्टी तू वो काल है, जिसने देखा अकाल

मंगल पर भी तू मिले, रंग तेरा हो लाल 

धूल पोंछते, धूल झाड़ते, रहते धूल से दूर

सब कुछ रहना इसी में, करले इसे कबूल

मिट्टी उपजे भोजन मिले, भोजन से संसार

मिट्टी अन्नपूर्णा सब की, उपज खाए संसार

पुतले बनाये, पुतले तोड़े, वो देखो कुम्हार

मन कृष्ण का दास है, मिट्टी लाई उधार

कर्ज मुक्त होने का, एको ही है उपाये

अपनी मिट्टी पहचान ले, मन को राम में लगाये

मिट्टी मिट्टी पर लिखे, मिट्टी पढ़त मुस्काये

मिट्टी होना ही नियम है, फिर काहे इतराये

US – Afgan satire

ना वो अफगानिस्तान के निकले, न किसी पठान के निकले

वो तो कुछ फिरंगे थे, जो अंग्रेजीस्तान के निकले

जोंक की तरह हर खनीज को लूटा, खज़ाने खाली खाली कर वो परेशान से निकले

जिससे सत्ता छिनी थी, उसी को नवाज़ दी

जाते जाते भी वो कर गए एक एहसान दुनिया पर,

लौट कर बुद्धू घर आया कहावत मान कर निकले

जब राक्षस ने दीखाये बड़े बड़े दांत बलवान को, वो कोलगेट और ब्रश से मांज कर निकले

गनी को समझा कर एक बड़ा ठस्सा दिया

वो छुपे जान बचाए, ये आल द बेस्ट कह कर निकले

अफगान की लड़ाई को, 20 साल का व्यंग बना दिया

वो ग़रीब के जनाजे पर, मूंछें तान कर निकले

जो करते थे दावा जुलम को मिटाने का, आतंकवादी को अपना असला थाम कर निकले

सैनिक बहादुर थे इसमे कोई संशय नहीं, बिडेन   की राजनीति पर पीठ तान कर निकले

मा ने लाल पकडाये कटेली तारो में, वो हमदर्दी दिखा कर उनके जहान से निकले

करूँ क्या कटाक्ष मैं शातीर बलवान पर, वो कटाक्ष पर कटाक्ष कर विमान से निकले

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Kanha – Milan ki Pyaas

कहां मिलोगे मुझे कन्हैया, कुछ तो अपनी राह बताओ

उम्र बीत गयी तुमको ढूँढ़ते, कभी कही तो टकरा जाओ

मैंने तो जन जन से पूछा, बहती हुई पवन से पुछा

कहाँ छिप गए हो मेरे कान्हा, अब बस और न मुझको तडपाओ

हम तो तेरे दास है स्वामी, तू तो है अन्तर्यामी

हम भक्तो से क्या शर्माना, हमे न चाहिए कोई खजाना

हम तो बस तेरे दर्शन के प्यासे, हमारी भी प्यास बुझाओ

कहां मिलोगे मुझे कन्हैया, कुछ तो अपनी राह बताओ

वृन्दावन ढूंडा, मथुरा ढूंडा

हर तीरथ हर मंदिर में ढूंढा

हर सुन्दर मूरत में ढूंढा, तेरी बनायी सूरत में ढूंढा

कहीं तो अपना दरस दिखाओ

कहां मिलोगे मुझे कन्हैया, कुछ तो अपनी राह बताओ

कब वो सूंदर घडी आएगी, जब तुम्हारी सूरत दिख जायेगी

चाहे वो अंत छड़ी हो, तपस्या कितनी भी कड़ी हो

तब तक तुम्हे ढूँढ़ते रहेगे, जब तक तुम मिल न जाओ

कहां मिलोगे मुझे कन्हैया, कुछ तो अपनी राह बताओ

हे मेरे कान्हा दरस दिखाओ, जीवन को तृप्त कर जाओ

आसान नहीं मुझसे पीछा छुड़ाना, मैं तो हूँ तुम्हारा पक्का दीवाना

जल्दी से अब आ भी जाओ, हे मेरे प्रभु दरस दिखाओ

कहां मिलोगे मुझे कन्हैया, कुछ तो अपनी राह बताओ

Jealousy discussion of Krishan Shringaar Articles

ये चर्चा है श्री कृष्ण के तीन अभिन्न श्रृंगारो की, कैसे वो एक दूसरे से प्रेम युक्त ईर्षा करते है

बांसुरी बोली कृष्ण चरण पर लिपटी धुल से –

हे बड़भाड़ी धुल रानी, ऐसी किस्मत कहाँ से लिखवाई

जिन चरनन का वंदन करे देवता, तू उनपर लिपटत जाई

साधु संत तुझे पाने ख़ातिर, जनमो की तपस्या करत आये

बड़बागी चरण धूल तू, परम पवित्र बन कर छायी

धुल का जवाब –

मैं बड़भागी बहुत इतराती, पूर्ण पुरुष का संग जो पाया

जब जब कान्हा आगे आये, हर कदम मेरे सीस पर आया

किन्तु इर्षा तुमसे करूँ थोड़ी –

जिस कान्हा साधे जग सारा, साधा तुझको वो कन्हैया

कृष्ण के लब और कृष्ण को साँसे, ये अहो भाग्य बस तुमने पाया

अभिन्न अंग हो तुम कान्हा का, जिसने सब संसार नचाया

बांसुरी का जवाब –

बात तुम्हारी सही मैं मानु, फिर भी इर्षा तुमसे जाणु

दूसरी इर्षा मोरपंख से, जो कृष्णा के माथे पर साजे

मोरपंख का जवाब-

बलिहारी मैं अपने स्वामी के, जिसने मुझे ये स्थान दिलाया

जिस कृष्ण ने सजाया संसार, मैंने उसके मस्तक को सजाया

हम तीनो का मान एक है, क्योंकि कृष्ण ने हमें अपनाया

इर्षा तो मुझको भी होवे, छू जो न पाती प्रभु कमल पाया

कृष्ण का जवाब –

तुम सब मेरे प्रिय हो अपने, तुम तीनो हो मेरी छाया

बलिहारी मैं तुम्हारी भक्ति पर, तुमने मुझे हमेशा सजाया

तुम तो मेरे परम भक्त हो, एक पल तुम्हारे बिन रह न पाया

प्राण प्यारे तुम तीनो मुझको, तुमने कृष्ण को श्री कृष्ण बनाया

ठुमक ठुमक कर नाचे कन्हैया

ठुमक ठुमक कर गोलू मोलू, मेरे मन को मोहता जाए

सांवला रंग तीखे नैना, कानो में कुण्डल सजाये

मनमोहक मुस्कान उसकी, माथे पर तिलक लगाये

मटक मटक कर नाचे कान्हा, यशोदा मां को खुब हसाये

माखन मिश्री प्यारे उसको, चोरी कर कर खाए खिलाये

शिशु अवस्था में पुतना मारि, मुख में तीनो लोक दिखाये

सारे जगत का तू स्वामी, कालिया नाग को मार बहाये

बंसी की धुन पर मोहित गोपिया, राधा संग वो रास रचाए

कंस मामा की मंशा को जाने, पाप कर्मों से मुक्ति दिलाए

स्वामी होकर सारथि बना जब, सब संसार को गीता ज्ञान दिलाये

ठुमक ठुमक कर नाचे कन्हैया, मेरा मन हर्षित होता जाए

नहीं चाहिए धन और दौलत, कान्हा तेरी भक्ति मिल जाए

लड्डू गोपाल घर में विराजे, मन मेरा मोहित होता जाए

ठुमक ठुमक कर गोलू मोलू, मेरे मन को मोहता जाए