Khwaab

ऐ ख्वाब कभी दिन मे भी आया करोआंखे भी तो जाने की तु दिखता क्या है निकलते नही जागकर देखे सपनेआंसु पूछते है आंखो  मे रड़कता क्या हैं तेरी  पलको की झलक जब याद आती हैंमेरी पलको मे फडकता क्या हैं मेरे ख्वाब कभी उनकी नींद मे भी हो आया करवो भी तो जाने हमारा रिश्ताContinue reading “Khwaab”